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एक और शाम

इसे पड़ने से पहले ये पड़े : Click here: हमेशा अकेले होने से बचता रहता हूँ, खाली बैठने से भागता रहता हूँ। आज बरसात ने रोक लिया है बाहर जाने से, तो आज बैठा हूँ अकेला कमरे...

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एक शाम

इस शाम के बारे में क्या कहूँ! ये शाम कुछ अलग है, ये एक दुर्लभ शाम है| कुछ ख़ास नही था इसमे पर सब कुछ आम से कुछ हटके था। सुबह शुरू हुई उस चीज़ से...

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Khamoshiii

Khasmosh ho jaate hai saare raaste Un khamosh lamho me mai kitaab k panne palat ti hu. Yun to tjhe pura jaanti hu mai Par har panne me ek naya roop paati hu tera. Ab kittab...

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