इस शाम के बारे में क्या कहूँ! ये शाम कुछ अलग है, ये एक दुर्लभ शाम है| कुछ ख़ास नही था इसमे पर सब कुछ आम से कुछ हटके था। सुबह शुरू हुई उस चीज़ से जो करना मुझे बहुत पसंद है। थिएटर प्ले की रिहर्सल। दिन भर ऑफिस में भी दिन अच्छा सा रहा। आज तन्खवाह आने का दिन भी था।😝 शाम को बारिश हुई। चाय की इच्छा हुई और बारिश में नही भीगना चाहता था तो चाय आर्डर कर ली। कहाँ से कहाँ आ गए हैं हम। 😅 अब जब खाना खा कर सोने लगा तो मेरी खिड़की से बाहर कहीं से आवाज़ आ रही थी, पुराने गाने बजने की। मेरे पसंदीदा गाने! गाना ख़त्म हुआ तो आवाज़ आयी "बात पे बात पे अपनी ही बात कहता है,मेरे अंदर मेरा छोटा सा शहर रहता है"। बस अपनी बिस्तर से उठने की इच्छा नही है, नही तो मैं उस इंसान को ढूँढ़ कर उससे बात करना चाहता हूँ, जो हिंदी प्रधान क्षेत्रों में भी ज़्यादा न सुने जाने में रेडियो सीरियल को यहाँ सुन रहा है, हैदराबाद में| नीलेश मिसरा मेरे भी फेवरेट हैं। और अब "यादों का इडियट बॉक्स" ख़त्म हुआ "बस इतनी सी थी ये कहानी" के साथ| अब गाना बज रहा है "जीवन के दिन छोटे सही, हम भी बड़े दिलवाले" ❤️
By Akshay Kurseja






